चंद्र नमस्कार कैसे करें ? know the 14 steps of moon salutation

  1. 🌙 चंद्र नमस्कार: शांति और संतुलन की ओर एक कदम(14 steps of moon salutation)

    चंद्र नमस्कार केवल एक योगासन नहीं, बल्कि हमारे मन और शरीर को संतुलित करने का एक अद्भुत तरीका है। जैसा कि चंद्रमा खुद रोशनी नहीं देता, लेकिन सूर्य के प्रकाश को प्रतिबिंबित कर रात में उजाला फैलाता है, वैसे ही चंद्र नमस्कार भी हमारे शरीर और मन को ठंडक और शांति प्रदान करता है।

    यह अभ्यास सूर्य नमस्कार की ही तरह आसनों के क्रम में होता है, लेकिन इसका प्रभाव अधिक शांत और स्थिरता देने वाला होता है। इसे करने से मानसिक शांति मिलती है, शरीर संतुलित रहता है और ऊर्जा का संचार होता है। अगर आप अपने जीवन में थोड़ा ठहराव और सुकून चाहते हैं, तो चंद्र नमस्कार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए। आइए जानते हैं इसे करने की सही विधि! 🌿✨

    चंद्र की शीतल छाँव में, समर्पण की राह चले,
    मन की शांति की राह में, हर कदम आगे बढ़ाएँ।
    हर आसन में प्रेम की धारा, हर सांस में शांति मिले
    चंद्र नमस्कार के संग हम, आत्मा को निर्मल बनाएँ।
    शांति और समर्पण से, तन-मन को शुद्ध बनाएँ,
    समर्पण से योग करें हम, जीवन को साकार करें।

🌙 चंद्र नमस्कार: शांति, संतुलन और ऊर्जा का संगम

चंद्र नमस्कार सिर्फ एक योग अभ्यास नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है जो शरीर और मन को शीतलता और शांति प्रदान करता है। इसे करने से न केवल तन को लचीलापन मिलता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। यह विशेष रूप से रात में करने के लिए उत्तम होता है, जिससे शरीर और मन दोनों को गहरी शांति मिलती है।

🧘 चंद्र नमस्कार की आसान विधि और मंत्र

🙏 1. प्रणामासन (Pranamasana) – सीधे खड़े हों, पैरों को मिलाकर रखें और दोनों हाथों को जोड़कर प्रार्थना मुद्रा में रखें। यह आसन ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करता है।
🔹 मंत्र: ॐ कामेश्वर्यै नमः

🙆‍♀️ 2. हस्त उत्तानासन (Hasta Uttanasana) – गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और शरीर को हल्का पीछे झुकाएं। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और रक्त संचार को बढ़ाता है।
🔹 मंत्र: ॐ भगमालिन्यै नमः

🙇‍♂️ 3. पादहस्तासन (Padahastasana) – सांस छोड़ते हुए आगे झुकें और अपने हाथों से पैरों को छूने की कोशिश करें। सिर को घुटनों के पास लाएं, इससे शरीर में लचीलापन आता है और पेट की चर्बी कम होती है।
🔹 मंत्र: ॐ नित्यक्लिन्नयै नमः

🏇 4. अश्व संचालनासन (Ashwa Sanchalanasana) – दाएं पैर को पीछे ले जाएं, बाएं पैर को आगे रखें, और दोनों हाथों को जमीन पर टिकाएं। सिर ऊपर उठाएं और छाती को खोलें। यह आसन शरीर में संतुलन बनाए रखता है।
🔹 मंत्र: ॐ भेरुंडयै नमः

🌙 5. अर्ध चंद्रासन (Aardh Chandrasana) – अपने भुजाओं को सिर के ऊपर उठाएं और ऊपर देखें। शरीर को हल्का पीछे झुकाएं ताकि यह अर्ध चंद्र के आकार का दिखे। इससे ऊर्जा का संचार बढ़ता है और मन को शांति मिलती है।
🔹 मंत्र: ॐ वह्निवासिन्यै नमः

⛰️ 6. पर्वतासन (Parvatasana) – बाएं पैर को भी पीछे ले जाएं और शरीर को वी-आकार में बनाएं। सिर को भुजाओं के बीच रखें और नितंबों को ऊपर उठाएं। यह रीढ़ को मजबूत करता है और तनाव दूर करता है।
🔹 मंत्र: ॐ वज्रेश्वर्यै नमः

🙏 7. अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskar) – अपने घुटनों, छाती और ठुड्डी को जमीन पर रखें और कूल्हों को ऊपर रखें। इससे शरीर में शक्ति और धैर्य बढ़ता है।
🔹 मंत्र: ॐ दुत्वै नमः

🐍 8. भुजंगासन (Bhujangasana) – पेट के बल लेटें, दोनों हाथों को जमीन पर रखें और सांस लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं। यह रीढ़ को लचीला बनाता है और मानसिक तनाव को कम करता है।
🔹 मंत्र: ॐ त्वरितायै नमः

🔄 9 से 14 तक इन्हीं आसनों को उल्टे क्रम में दोहराएं और चंद्र नमस्कार को पूरा करें।

🌿 चंद्र नमस्कार के अनोखे लाभ

✨ मन को गहरी शांति और संतुलन देता है।
✨ महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी, हार्मोन संतुलन बनाए रखता है।
✨ दिनभर की थकान और मानसिक तनाव को कम करता है।
✨ नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है, जिससे अनिद्रा की समस्या दूर होती है।
✨ शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है।

रोज़ाना चंद्र नमस्कार करने से जीवन में एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है। इसे अपनाएं और अपने शरीर और मन को सुकून और ताजगी से भरें!

चंद्र नमस्कार के फायदे :-

🌙 चंद्र नमस्कार: मन और शरीर को शांति देने वाला योग अभ्यास

चंद्र नमस्कार सिर्फ एक योग अभ्यास नहीं, बल्कि एक खूबसूरत तरीका है अपने मन और शरीर को सुकून देने का। जहां सूर्य नमस्कार आपको दिनभर की ऊर्जा देता है, वहीं चंद्र नमस्कार आपको दिनभर की थकान को मिटाकर अंदर से शांत और संतुलित महसूस करने में मदद करता है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में!

✨ चंद्र नमस्कार के अद्भुत फायदे

🧘 प्रणामासन – अगर आप तनाव या चिंता से परेशान हैं, तो प्रणामासन करने से मन को शांति और संतुलन मिलता है। यह आपको अंदर से स्थिर और सकारात्मक महसूस करने में मदद करता है।

🌬️ हस्तोत्तानासन – यह आसन आपकी छाती को खोलता है, जिससे सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और शरीर मजबूत बनता है।

🔥 पादहस्तासन – पेट की चर्बी कम करने और पाचन को बेहतर बनाने के लिए यह आसन कमाल का है। साथ ही, इससे शरीर में रक्त संचार भी बढ़ता है, जिससे आप ज्यादा ऊर्जावान महसूस करते हैं।

🌀 श्वसन अभ्यास – अगर शरीर अकड़न महसूस कर रहा हो, तो यह अभ्यास पीठ और पैरों की मांसपेशियों को लचीला बनाकर आपको हल्का और रिलैक्स महसूस कराता है।

🌗 अर्धचंद्रासन – यह आपके शरीर को मजबूत और लचीला बनाता है। खासतौर पर रीढ़ की हड्डी और निचले शरीर (पैर, घुटने, टखने, कूल्हे) की ताकत को बढ़ाने में मदद करता है।

🐍 भुजंगासन – अगर आपको अक्सर पीठ दर्द रहता है, तो यह आसन आपके लिए बहुत फायदेमंद है।

💙 चंद्र नमस्कार – यह पूरे मन और शरीर को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे आप मानसिक रूप से ज्यादा शांत और स्थिर महसूस करते हैं।

🕰️ चंद्र नमस्कार करने का सही समय

🌙 रात का समय सबसे बढ़िया होता है, खासकर जब चंद्रमा आसमान में चमक रहा हो। यह आपको दिनभर की भागदौड़ से आराम देकर अंदर से सुकून देता है।

☀️ अगर रात में समय न मिले, तो सूर्योदय से पहले भी कर सकते हैं। सुबह के समय भी इसका अभ्यास आपके शरीर और मन को तरोताजा कर सकता है।

🍽️ खाने के तुरंत बाद न करें – बेहतर परिणाम के लिए इसे खाली पेट या हल्का खाना खाने के 2-3 घंटे बाद करें।

🌿 अपनाएं यह योगिक तरीका और पाएं सुकून भरी ज़िंदगी! 😊💖

चन्द्र नमस्कार द्वारा चक्रों का जागरण (14 steps of moon salutation) :-

सूर्य नमस्कार के प्रत्येक आसन का न केवल शरीर के विभिन्न चक्रों पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि इन चक्रों के संतुलन से हमें कई मानसिक और शारीरिक लाभ भी मिलते हैं। नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक आसन के साथ-साथ संबंधित चक्र और उससे मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभों का विवरण दिया गया है।

आसन संबंधित चक्र प्रत्यक्ष लाभ
प्रणामासन अनाहत चक्र प्रेम, करुणा, आंतरिक शांति
हस्त उत्तानासन विशुद्ध चक्र अभिव्यक्ति की क्षमता में सुधार, आत्मविश्वास बढ़ना
पाद हस्तासन स्वाधिष्ठान चक्र लचीलापन, भावनात्मक संतुलन
अश्व संचालासन आज्ञा चक्र आत्म-नियंत्रण, आंतरिक दृष्टि, स्पष्टता
अर्ध चंद्रासन विशुद्ध चक्र शारीरिक संतुलन, मानसिक स्पष्टता
पर्वतासन मणिपुर चक्र आत्मविश्वास, स्थिरता, इच्छाशक्ति
अष्टांग नमस्कार स्वाधिष्ठान चक्र समर्पण, विनम्रता, ऊर्जा प्रवाह में संतुलन
भुजंगासन विशुद्ध चक्र बेहतर संचार, गले और छाती का खुलना
पर्वतासन आज्ञा चक्र ध्यान, मानसिक स्पष्टता, आंतरिक शांति
अश्व संचालासन स्वाधिष्ठान चक्र रचनात्मकता में वृद्धि, भावनात्मक संतुलन
अर्ध चंद्रासन विशुद्ध चक्र शारीरिक लचीलापन, आत्म-अभिव्यक्ति
पाद हस्तासन स्वाधिष्ठान चक्र लचीलापन, यौन ऊर्जा का संतुलन
हस्त उत्तानासन स्वाधिष्ठान चक्र सृजनात्मकता और जीवन में नई ऊर्जा
प्रणामासन अनाहत चक्र करुणा, प्रेम और आत्म-संतुलन

इस तालिका से यह स्पष्ट है कि प्रत्येक आसन का न केवल चक्रों पर सकारात्मक प्रभाव होता है, बल्कि इससे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक लाभ भी प्राप्त होते हैं। उदाहरण के लिए, प्रणामासन अनाहत चक्र को सक्रिय कर हमें प्रेम और करुणा का अनुभव कराता है, जबकि अश्व संचालासन आज्ञा चक्र को जागृत कर आत्म-नियंत्रण और आंतरिक स्पष्टता को बढ़ाता है।

सावधानी

  1. चन्द्र नमस्कार करते समय अपने मन को शांत और ध्यान केंद्रित रखें. चन्द्र नमस्कार शुरू करने से पहले एक अच्छा वार्म-अप करें ताकि आपके जोड़ों और मांसपेशियों को लचीला और सक्रिय बनाया जा सके।
  2.  शुरू में, चन्द्र नमस्कार के आसनो को केवल 2-3 राउंड से करें, फिर अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे बढ़ाएं।
  3. चन्द्र नमस्कार शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह लें अगर आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्लिप डिस्क या कोई अन्य गंभीर बीमारी है।
  4. अभ्यास करते समय आरामदायक और ढीले कपड़े पहनें।
  5. महिलाओं को गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान चन्द्र नमस्कार नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
  6. Chandra Namaskar आसन में श्वास लेने और छोड़ने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
    अभ्यास के बाद कुछ मिनट आराम करें।
  7. आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से चन्द्र नमस्कार अभ्यास करें।
    इस तरह, आप इन टिप्स और सावधानियों का पालन करके चंद्र नमस्कार आसान का पूरा लाभ उठा सकते हैं।

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