योग करने वाले को किस प्रकार का भोजन करना चाहिए ? know what is yogic diet ?

आज के व्यस्त जीवन में योग हमें स्वास्थ्य और सुख-शांति के मार्ग की ओर ले जाता हैं, जिससे हम एक संतुलित और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। योग के माध्यम से हम अपने शरीर को मजबूत और लचीला बना सकते हैं, साथ ही तनाव और चिंता को कम कर सकते हैं। योग के साथ-साथ एक अच्छा और संतुलित आहार भी स्वस्थ रहने के लिए बहुत ही आवश्यक माना गया हैं, तो आइए इस ब्लॉग के माध्यम से हम जानेंगे की योग करने वाले को किस प्रकार का भोजन करना चाहिए know what is yogic diet ?

भोजन के प्रकार :-

मनुष्य में सत्व, रज, और तम तीन महत्वपूर्ण गुण (त्रिगुण) हैं जो मन और शरीर दोनों पर प्रभाव डालते हैं। जो योग की जीवनशैली में बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। अनेक ग्रंथों और भगवद गीता में भी भोजन के प्रकारों का वर्णन मिलता है। जिसमें श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश में सत्व, रज, और तम गुणों के आधार पर भोजन के तीन प्रकार को बताया गया है। जिसके द्वारा हम जानेंगे की योग करने वालो के लिए किस प्रकार का भोजन सबसे अच्छा होता है?
भगवद गीता: अध्याय 17,
श्लोक 8:
“आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः।
रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाः॥”
अर्थ:
सात्विक गुण के व्यक्ति ऐसे भोजन को पसंद करते हैं जो आयु को बढ़ाने वाला, तथा पुण्य, शक्ति, स्वास्थ्य, सुख और संतुष्टि को बढ़ाता हो। ऐसे भोजन रसीले, पौष्टिक, और हृदय को प्रिय हो, वह सात्विक आहार है।
श्लोक 9:
“कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः।
आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः॥”
अर्थ:
जो भोजन कटु (कड़वा), अम्ल (खट्टा), लवण (नमकीन), अत्युष्ण (बहुत गरम), तीक्ष्ण (तीखा), रूक्ष (सूखा) और मिर्च से भरा होता है। वह राजसिक आहर हैं। ऐसा भोजन, शोक और रोग उत्पन्न करने वाला होता हैं, वह रजोगुणी व्यक्तियों को प्रिय होता है।
श्लोक 10:
“यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत्।
उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम्॥”
अर्थ: जो आहार अधिक पका हुआ, बासी, सड़ा हुआ, प्रदूषित तथा अशुद्ध भोजन हो वह तामसिक आहार है। ऐसा भूजन तामसी व्यक्तियों को प्रिय होता है।
ऊपर दिए श्लोकों से स्पष्ट होता है कि भगवद गीता में भी भोजन के प्रकार और उनके गुणों का वर्णन किया गया है। जिसके आधार पर समझा जा सकता है कि सात्विक भोजन योग की जीवनशैली और स्वास्थ्य लिए श्रेष्ठ है।

भोजन-के-प्रकार

योग से पहले और बाद में क्या खाएं सम्पूर्ण गाइड :-

योग के पहले और बाद में स्वस्थ भोजन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके शरीर के ऊर्जा स्तर और संपूर्ण स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। योग खाने के 3 से 4 घंटे बाद करना चाहिए, तुरंत नहीं। यदि खाली पेट योग करना संभव नहीं है, तो योग से पहले कुछ हल्का और पोषक भोजन, जैसे दही, फल या एक मुट्ठी नट्स ले सकते हैं। जिससे आपके शरीर को ऊर्जा मिल सके और आप अभ्यास बिना किसी समस्या के कर सकें।
आपके शरीर को अधिक ऊर्जा देने के लिए दाल, सब्जियाँ, फल और छाछ के 30 से 40 मिनट बाद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आहार का सेवन कर सकते हैं। यह आहार आपको पूरे दिन ऊर्जा से भरपूर रखेगा और आपकी मांसपेशियों को पुनर्जीवित करेगा। आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करने वाले मसालेदार और भारी भोजन से बचें।.

योगिक आहार :-

शाकाहारी संतुलन

योगिक जीवनशैली को पूर्ण करने के लिए सही आहार का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक संतुलित योगिक आहार न केवल शरीर को आवश्यक कैलोरी, प्रोटीन, और कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है, बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति को भी बढ़ावा देता है। ऐसे आहार में प्राकृतिक और शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता दी जाती है। दिन भर की कैलोरी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सही मात्रा में अनाज, दालें, हरी सब्जियाँ, फल और नट्स का सेवन किया जाता है। एक योगी के लिए, प्रोटीन की प्राप्ति दालों, पनीर, सोया, और नट्स से की जाती है, जबकि कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकताएँ साबुत अनाज, चावल और आलू से पूरी की जाती हैं। इसके साथ ही शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल्स हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों से मिलते हैं। इस प्रकार का आहार पाचन तंत्र को मजबूत करता है, ऊर्जा बनाए रखता है और शारीरिक संतुलन को बेहतर बनाता है।

भोजन मात्रा प्राप्त पोषक तत्व
चपाती (गेहूं की रोटी) 2-3 रोटियाँ कार्बोहाइड्रेट, फाइबर
मूंग दाल 1 कप (200 ग्राम) प्रोटीन, विटामिन B, फाइबर
ब्राउन राइस 1 कप (150 ग्राम) कार्बोहाइड्रेट, फाइबर
पनीर (लो-फैट) 100 ग्राम प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन D
हरी सब्जियाँ (पालक, मेथी) 1 कप (200 ग्राम) आयरन, फाइबर, विटामिन C, एंटीऑक्सिडेंट्स
सोयाबीन 50 ग्राम (पकी हुई) प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड
दही (लो-फैट) 1 कप (150 ग्राम) प्रोटीन, कैल्शियम, प्रोबायोटिक्स
बादाम और अखरोट 5-6 बादाम, 2 अखरोट हेल्दी फैट्स, प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड
केला 1 बड़ा केला कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, विटामिन B6
दूध (लो-फैट) 1 ग्लास (200 ml) प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन D
जई (ओट्स) 1/2 कप (40 ग्राम) कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन

 

योग करने वालो क लिए सात्विक आहार का महत्व :-

योग के पहले और बाद में स्वस्थ भोजन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपके शरीर के ऊर्जा स्तर और संपूर्ण स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। योग खाने के 3 से 4 घंटे बाद करना चाहिए, तुरंत नहीं। यदि खाली पेट योग करना संभव नहीं है, तो योग से पहले कुछ हल्का और पोषक भोजन, जैसे दही, फल या एक मुट्ठी नट्स ले सकते हैं। जिससे आपके शरीर को ऊर्जा मिल सके और आप अभ्यास बिना किसी समस्या के कर सकें।
आपके शरीर को अधिक ऊर्जा देने के लिए दाल, सब्जियाँ, फल और छाछ के 30 से 40 मिनट बाद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आहार का सेवन कर सकते हैं। यह आहार आपको पूरे दिन ऊर्जा से भरपूर रखेगा और आपकी मांसपेशियों को पुनर्जीवित करेगा। आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करने वाले मसालेदार और भारी भोजन से बचें।
भोजन के तीन गुण हैं: सात्विक, राजसिक और तामसिक। सत्व का अर्थ है ज्ञान, स्पष्टता और शुद्धता। यह गुण एक व्यक्ति को स्थिर, शांत और स्थिर बनाता है। रज शब्द गतिशीलता, सक्रियता और उत्तेजना को बताता है। यह मन को अस्थिर, चिंतित और उत्सुक बनाता है। तम का अर्थ है आलस्य, निष्क्रियता और अज्ञानता। यह गुण व्यक्ति को आलसी बनाता है। सात्विक आहार, जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध और स्थिर रखता है, आयुर्वेद और योग के साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। सात्विक भोजन हमेशा ताजे, शुद्ध और आसानी से पचते हैं, जैसे: दूध नट्स, गुड़ और फल, शहद, अंकुरित अनाज, व केला हरी सब्जियां हैं। यह मसाले युक्त भोजन से फायदे होते हैं और प्रोटिन की अधिक मात्रा मिलती है, जो शरीर के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।.

Leave a Comment